Sunday, May 16, 2021

अगर आपने भी की है इंस्टा पर इस संस्था की स्टोरी शेयर, तो पढ़ें ये रिसर्च!

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क्राइम वीक न्यूज़ : जिस NGO की पोस्ट लाखों बार इंस्टाग्राम पर भारतीयों ने शेयर की, क्या उसके बारे में एक बार भी गूगल पर जाकर देखा की वो संस्था है कहां की? उसका मकसद क्या है? उसका काम क्या है? उसका इतिहास क्या है? उसने पहले किसके लिए काम किया है? या फिर उसको पहले फंड कौन करता था? कहीं आपका पैसा किसी गलत जगह तो नहीं पहुंच गया?

क्या है IMANA?
IMANA नॉर्थ अमेरिका की एक संस्था है, जिसका पूरा नाम है “इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका”। 1967 में, ओहियो के कोलंबस में हुई मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन की वार्षिक बैठक में कुछ मुस्लिम चिकित्सकों द्वारा मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन की एक शाखा के रूप में मुस्लिम मेडिकल एसोसिएशन की स्थापना की थी जो कि बाद में ‘इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ के रूप में विकसित हुआ।
कुछ माह उपरांत मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन के द्वारा ‘इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ द यूएस एवं कनाडा’ नामक एक अलग इकाई का गठन किया गया और न्यूयॉर्क शहर में वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। बाद में इसका नाम “इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका” पड़ा।

ये सारी जानकारी IMANA की साइट पर मौजूद है, अब इसमें कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आईं। इन बातों को अगर बिंदुवार लिखा जाए तो ज्यादा बेहतर रहेगा।

1. जिस मुस्लिम मेडिकल एसोसिएशन (MMA) का गठन किया गया था उसका आगे जाकर नाम पड़ा इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका (ISNA)

2. मुस्लिम मेडिकल एसोसिएशन से ही ‘द इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन’ का जन्म हुआ जिसका आगे नाम बदलकर “इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका”(IMANA) पड़ा।

3. इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका (ISNA) की एक ब्रांच कनाडा में भी मौजूद है जिसको कनाडा द्वारा 2018 में एक साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था।

4. संस्था का प्रतिबंधित होने का मुख्य कारण था उसकी आतंकी संगठनों को फंडिंग, एक आरोप में ISNA कनाडा को टेरर फंडिंग का दोषी पाया गया था। कनाडा रिवेन्यु एजेंसी (CRA) के मुताबिक संस्था ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन से मदद ली थी।

IMANA का उद्देश्य है की मुस्लिम चिकित्सक, मुस्लिम लोगों का ट्रीटमेंट करें। IMANA ने ISNA के साथ साझेदारी भी की हुई है। IMANA द्वारा पिछले दिनों से भारत में मुहिम चलाई गई जिसका नाम था ‘हेल्प इंडिया ब्रीथ’। तो क्या भारतवासी एक ऐसी संस्था की मदद कर रहे थे जिसका संबंध ISNA से है जो की टेरर फंडिग मामले में दोषी थी? क्या हम लोगों को कहीं भी फंड करने से पहले नहीं सोचना चाहिए? क्या हम भावना में इतने बह जाते हैं कि हमें ये नहीं पता होता की हमारा पैसा लग किस जगह रहा है? एक विदेशी संस्था में फंड करने की क्या जरुरत है जबकी भारत में खुद काफी सारी संस्थाएं काम कर रही हैं। अभी तक दुनिया भर में ‘हेल्प इंडिया ब्रीथ’ के नाम पर 8 करोड़ रुपए से ज्यादा इकट्ठा कर लिया है।

क्राइम वीक न्यूज़ : अमन त्यागी

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