निजीकरण का फैसला 3 महीने के लिए टला, कर्मचारियों की होगी जल्द वापसी

 

क्राइम वीक न्यूज़ ब्यूरोयूपी में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में हड़ताल की। बिजली विभाग में काम नहीं होने की वजह से कई इलाकों में सप्लाई नहीं हो रही हैं। हड़ताल से केवल आम लोगों को ही परेशानी नहीं झेलनी पड़ी बल्कि लखनऊ में डेप्युटी सीएम, ऊर्जा मंत्री समेत कुल 36 मंत्रियों के घर भी अंधेरे रहा। अब 3 महीने बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।

यूपी सरकार के साथ करीब 4 घंटे चली बातचीत के बाद बिजली कंपनियों के निजीकरण के प्रस्ताव को फिलहाल 3 महीने तक टालने की बात कही गई हैं। इस दौरान बिजली कंपनियों को सरकार की लाइन लॉस कम करने, राजस्व वसूली बढ़ाने जैसे शर्तों को भी पूरा करना होगा।

सरकार के साथ हुई बैठक में इस बात पर बिजली विवरण के काम को भ्रष्टाचार मुक्त करने, बिलिंग और कलेक्शन एफिसिएन्सई बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। कस्टमर सैटिस्फैक्शन के लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। निजीकरण के सभी प्रस्ताव फिलहाल 15 जनवरी 2021 तक वापस ले लिए गए हैं। इस दौरान बिजली कंपनियों के कामकाज की हर महीने समीक्षा की जाएगी। 

उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम ने बताया, फिलहाल 3 महीने तक निजीकरण के प्रस्ताव को टाल दिया गया हैं। इस दौरान बिजली कंपनियों से उम्मीद की गई हैं की वे लाइन लॉस कम करने और राजस्व वसूली के लक्ष्यों को हासिल करेंगी। हालांकि यह काम इतना आसान नहीं हैं। जो काम इतने सालों में नहीं हो पाया, उसे 3 महीने में बिजली कंपनियां कैसे पूरा करेंगी।

हालांकि, इस आश्वासन के साथ ही बिजली कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार को वापस ले लिया हैं और काम पर लौट गए हैं। इससे प्रदेश की जनता को काफी राहत मिलेगी। 2 दिन चले कार्य बहिष्कार से पूर्वांचल के कई जिलों को भारी बिजली किल्लत का सामना करना पड़ा हैं। मगर बिजली कंपनियों के कर्मचारियों के पास इसके अलावा और कोई रास्ता भी नहीं था।

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क्राइम वीक न्यूज़ ब्यूरोकीर्ति भाटिया

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